क्या आप जानते हैं, केले का पेड़ एक ऐसा पेड़ हैं, जिसमें कोई लकड़ी नहीं होती है. लेकिन, ऐसा होते हुए भी इसके हर भाग को किसी न किसी रूप में प्रयोग किया जाता हैं. भारत सहित पूरी दुनिया कहीं-न-कहीं में इसके हर भाग, जैसे- फल, फूल और तने को खाया जाता है.

केले का पत्ता खाया तो नहीं जाता है, लेकिन खाना पकाने और खाने लिए पत्तल के रूप में अब उपयोग में लाया जाता है. प्राचीन काल से केले का पत्ता भोजन के लिए थाली का बेहतरीन विकल्प रहा है, जिसमें खाने का एक अलग सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्त्व है.

केले की खेती, भारत है न. 1

केले की खेती के बारे में कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि इसकी खेती लगभग 4000 पहले मलेशिया और पापुआ न्यू गिनी में शुरु हुई थी. वर्तमान में, भारत, विश्व का सबसे अधिक केला उत्पादक देश है. भारत में इसकी की खेती महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, बिहार, कर्नाटक और असम में सबसे ज्यादा होती है. आपको बता दें, महाराष्ट्र के भुसावल को ‘भारत की केला नगरी’ कहा जाता है.

केले की वेरायटी

केले का वैज्ञानिक नाम मूसा एक्यूमिनाटा है. पूर्व प्रचलति नाम मूसा सेपिनटम अब व्यवहार में नहीं लाया जाता है. बसराई, ड्वार्फ, हरी छाल, सालभोग, अल्पान, रोवस्ट और पुवन आदि ये सब केले की उन्नत वेरायटी हैं, जिसे हम फल के रूप में खाते हैं. केले की कई ऐसी वेरायटी है, जिन्हें बतौर सब्जी यूज किया जाता है. ऐसी वेरायटी में कोठिया, बत्तीसा, मुनथन और कैम्पिरगंज केले काफी महत्त्पूर्ण हैं.

केला में पाए जाने वाले पोषक तत्त्व

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केले का पेड़ एक ऐसा पेड़ हैं, जिसमें कोई लकड़ी नहीं होती है. लेकिन, ऐसा होते हुए भी इसके हर भाग, जैसे- फल, फूल और तना आदि को भारत सहित पूरी दुनिया में किसी न किसी रूप में खाया जाता है.

अपने सामान्य ज्ञान में यह शामिल कर लीजिये कि केला पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा खाया जाने वाला फल है. एक शोध के अनुसार, यह युगांडा में सबसे अधिक खाया जाता है. एक युगांडावासी एक वर्ष में औसतन 225 केला खाते है.

केला कच्चा और पक्का दोनों खाया जाता है. एक पके हुए मध्यम आकार के पके हुए केले में लगभग 110 कैलोरी, 0 ग्राम वसा (फैट), 28 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 15 ग्राम प्राकृतिक, 1 ग्राम प्रोटीन, 3 ग्राम फाइबर और 450 मिलीग्राम पोटेशियम होती है.

आयरन के अतिरिक्त अतिरिक्त केला में विटामिन बी 6, विटामिन सी, मैग्नीशियम और मैंगनीज भरपूर मात्रा में होता है.

केले का फूल दूर करता है एनीमिया

केला में एक ही फूल होता है, जो नर फूल होता है. जब केले में फलियाँ यानी छीमियाँ लग जाती हैं, तो उसे काट कर हटा दिया जाता है. देश के अनेक भागों में, विशेष कर पूर्वोत्तर भारत में, केले फूल की सब्जी और पकौड़े बनाए जाते हैं. केले के फूल से बने व्यंजन के बारे में आयुर्वेद विशेषज्ञ बताते हैं कि इसके नियमित सेवन से एनीमिया यानी खून की कमी की बामारी दूर हो जाती है.

क्यों किया जाता है केले के पत्ते पर भोजन

देश में अनके जगहों, खासकर दक्षिण भारत में, इसके पत्तो का इस्तेमाल खाना खाने के लिए प्लेट की तरह होता है. यह केवल एक रिवाज नहीं है. बल्कि, इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है. हरे और ताजे केले के पत्ते में भोजन करने शरीर को आयन-युक्त आयरन यानी लोहा नेचुरल तरीके से प्राप्त होता है. फलतः शरीर में कभी खून की कमी नहीं हो पाती है और साथ ही सेहत को बहुत सारे फायदे होते हैं.

इसलिए यदि आप अपने भोजन में प्राकृतिक रूप से लौह-तत्त्व शामिल करना चाहते हैं, तो जब भी मौका मिले तो केले के पत्ते पर भोजन रखकर खाने का प्रयास कीजिए.

केले पेड़ की छाल से बनते हैं कपड़े

क्या आप जानते हैं, केले के छाल से कपड़े बनाये जाते हैं, जिसकी चमक और मुलायमपन से रेशम भी मात खा जाती है. पेड़ और तने से गत्ते-कागज़ आदि का निर्माण भी होता है. इसलिए केले के पेड़ में लकड़ी नहीं होने के बावजूद इसे दूसरे पेड़ों के मुकाबले कम नहीं आँका जा सकता है.